बात ख़त्म हुई और तुम मुड़ गए
चादर समेट कर दीवार से जुड़ गए
आग ठंडी पड़ गई पल भर में
तुम अजनबी बन गए अपने ही घर में
साँस तुम्हारी गहरी होने लगी
मेरी बाहें तुम्हें ढूँढती रह गईं
मुझे सिर्फ जिस्म की राहत नहीं चाहिए थी
कुछ देर बस सीने से लगना था
ये सन्नाटा मुझे डसता है जब तुम सोते हो
क्या इतना मुश्किल था मेरा हाथ थामना?
हाँ, बस यूँ ही थामना
नमी अभी सूखी भी नहीं चमड़ी पर
और तुमने खींच ली लकीर बिस्तर पर
काम निकल गया तो मुँह फेर लिया
अंधेरे ने मुझे फिर से घेर लिया
खालीपन भरता है सीने के कोने में
दर्द होता है यूँ पास होकर भी दूर होने में
मुझे सिर्फ जिस्म की राहत नहीं चाहिए थी
कुछ देर बस सीने से लगना था
ये सन्नाटा मुझे डसता है जब तुम सोते हो
क्या इतना मुश्किल था मेरा हाथ थामना?
हाँ, बस यूँ ही थामना
क्या मैं सिर्फ एक ज़रूरत थी?
जो पूरी हुई और बात ख़त्म?
पीठ फेर कर सोना तुम्हारा
दे जाता है एक नया ज़ख़्म
मुझे सिर्फ जिस्म की राहत नहीं चाहिए थी
कुछ देर बस सीने से लगना था
ये सन्नाटा मुझे डसता है जब तुम सोते हो
क्या इतना मुश्किल था मेरा हाथ थामना?
(क्या इतना मुश्किल था?)
हाँ, बस यूँ ही थामना
रात कट जाएगी किसी तरह
पर दिल में ये टीस रहेगी
तुम सोते रहोगे चैन से
और मेरी रूह जागती रहेगी
(जागती रहेगी)