बात ख़त्म हुई और मुड़ गये तुम..
बात ख़त्म हुई और तुम मुड़ गए चादर समेट कर दीवार से जुड़ गए आग ठंडी पड़ गई पल भर में तुम अजनबी बन गए अपने ही घर में साँस तुम्हारी…
बात ख़त्म हुई और तुम मुड़ गए चादर समेट कर दीवार से जुड़ गए आग ठंडी पड़ गई पल भर में तुम अजनबी बन गए अपने ही घर में साँस तुम्हारी…
यह एक बहुत ही गहरा और सामयिक विषय है। यह सच है कि तकनीक ने हमें सुविधा दी है, लेकिन साथ ही इसने हमें एक अदृश्य जंजीर में जकड़…
यहां 90 के दशक की भारत की कुछ बेहतरीन चीजें दी गई हैं जो आपको स्मृति लेन में ले जाएंगी। मुझे यकीन है कि अब आप कितने बड़े हो …